उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के लक्ष्य तथा उद्देश्य

अधिनियम के मूल उद्देश्य अधिनियम द्वारा संरक्षित उपभोक्ता के अधिकार खतरनाक माल विरुद्ध संरक्षण उपभोक्ता जीवन एवं सम्पत्ति के लिये हानिकारक माल एवं सेवाओं विपणन (मार्केटिंग) के सम्बन्ध में सुरक्षा रखता है. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 6 (a) के अनुसार, जीवन एवं सम्पत्ति के परिसंकटमय माल एवं सेवाओं के विपणन के विरुद्ध उपभोक्ताओं … Read more

राज्य आयोग का गठन एवं क्षेत्राधिकार

राज्य आयोग का गठन उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 16 के अनुसार, राज्य आयोग का गठन, अध्यक्ष तथा दो सदस्यों, जिनमें एक महिला सदस्य, से होगी. अर्थात राज्य आयोग में अध्यक्ष को मिलाकर कम से कम तीन सदस्य होते हैं | योग्यता अध्यक्ष के लिए ऐसे व्यक्ति को नियुक्त किया जा सकता है. जो … Read more

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 की विशेषताएं

उपभोक्ता को शोषण से बचाने के लिए समय-समय पर विभिन्न अधिनियम पारित होते रहे हैं. लेकिन वे उपभोक्ता के लिए अधिक मददगार साबित नहीं हुए. इसी कारण सन् 1986 में उपभोक्ता के हितों को ध्यान में रखते हुए और उसे संरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम को पारित किया गया | 1. … Read more

न्यूसेंस क्या है? | न्यूसेंस का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं आवश्यक तत्व

न्यूसेंस का अर्थ अपदूषण या उपताप को प्रचलित या अंग्रेजी भाषा में न्यूसेंस कहते हैं. ‘न्यूसेंस’ शब्द फ्रेन्द शब्द ‘न्यूरे’ तथा लैटिन शब्द ‘नोसेरे’ से लिया गया है, जिसका अभिप्राय होता है. ‘बाधा पैदा करना तथा हानि पहुँचाना.’ व्यापक अर्थों में न्यूसेंस का अर्थ है ”किसी अन्य व्यक्ति की भूमि, भवन या सम्पत्ति को हानि … Read more

धोखा या छल की परिभाषा एवं आवश्यक तत्व | धोखा के अपकृत्य की कार्रवाही में कौन-कौन से बचाव किये जा सकते हैं?

धोखा या छल की परिभाषा तथ्यों की वास्तविकता को जानते हुए गलत तथ्यों को प्रस्तुत करना, ऐसे निर्भय कथन करना, जिनकी सत्यता अथवा असत्यता पर विचार न किया गया हो और इस भावना एवं आशय से मिथ्या या गलत कथन करना कि जिस व्यक्ति के समक्ष कथन किया गया है, वह उस पर विश्वास करे; … Read more

मानहानि के प्रकार

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है. उसका समाज में अपना अस्तित्व होता है, और हर व्यक्ति अपने अस्तित्व को बनाये रखने का प्रयास करता है. मनुष्य को अनेक सामाजिक कर्तव्यों का निर्वाह करना होता है एवं उसके लिए अनेक संघर्षो का सामना भी करना पड़ता है. उसे सामाजिक, आर्थिक एवं व्यक्तिगत सुरक्षा के अनेक अधिकार उपलब्ध … Read more

मानहानि क्या है? | मानहानि की परिभाषा एवं आवश्यक तत्व

मानहानि की परिभाषा मानहानि (Defamation) की परिभाषा विभिन्न विधिशास्त्रियों ने भिन्न-भिन्न प्रकार से की है. कुछ प्रमुख परिभाषाएं निम्नलिखित है- अण्डरहिल के अनुसार, “मानहानि प्रतिष्ठा को कलंकित करने वाला ऐसा झूठा कथन है, जिसका प्रकाशन किया गया हो, जिसके प्रकाशन से वादी की प्रतिष्ठा को क्षति पहुँची हो तथा जिसको प्रकाशित करने का कोई विधिक … Read more

हमला एवं संप्रहार की परिभाषा, आवश्यक तत्व क्या है? दोनों में क्या अंतर है?

हमला की परिभाषा हमला या आक्रमण (Assault) की परिभाषा विभिन्न विधिशास्त्रियों ने भिन्न-भिन्न प्रकार से की है. कुछ प्रमुख परिभाषाएं निम्नलिखित है- सामग्रड के अनुसार, ‘बिना वैध औचित्य के किसी व्यक्ति के शरीर के प्रति अभिप्रायपूर्वक बल का प्रयोग आक्रमण (Assault) कहा जाता है।’ प्रोफेसर विनफील्ड के अनुसार, ‘आक्रमण से अभिप्राय प्रतिवादी के उस कार्य … Read more

क्षतिपूर्ति के विभिन्न प्रकार क्या है? | क्षतिपूर्ति कैसे निर्धारित की जाती है?

क्षतिपूर्ति का अर्थ किसी अपकृत्य द्वारा पहुंची हुई क्षति को पूरा करने के लिए क्षतिग्रस्त व्यक्ति को क्षतिकर्ता से दिलाई गई धनराशि क्षतिपूर्ति कही जाती है. क्षतिपूर्ति का उद्देश्य क्षतिग्रस्त व्यक्ति को आर्थिक संतोष देने के साथ-साथ क्षतिकर्ता को दण्ड देना भी है ताकि वह भविष्य में ऐसी त्रुटि न करे | क्षतिपूर्ति के प्रकार … Read more

मानसिक आघात क्या है? | मानसिक आघात में दायित्व का निर्धारण कैसे किया जाता है?

मानसिक आघात विधि इतिहास के प्रारम्भिक काल में केवल ऐसी शारीरिक क्षति के लिए ही क्षतिपूर्ति का दावा किया जा सकता था जो चोट लगने से हो. मानसिक आघात के कारण हुई क्षति की पूर्ति के लिए बाद नहीं चलाया जा सकता था. स्पष्ट रूप से यह नियम अन्यायपूर्ण था, परन्तु इसे बदलने के लिये … Read more