IPC की धारा 375 क्या है? | बलात्कार की परिभाषा | बलात्कार के अपराध के आवश्यक तत्व

बलात्कार की परिभाषा बलात्कार (Rape) की परिभाषा को भारतीय दण्ड संहिता (IPC) की धारा 375 में परिभाषित किया गया है. बलात्कार की परिभाषा को दण्ड विधि (संशोधन) अधिनियम, 2013 (2013 का 13) की धारा 9 द्वारा धारा 375 के स्थान पर प्रतिस्थापित किया गया जो 3 फरवरी, 2013 से लागू है. इस संशोधन के द्वारा … Read more

मुस्लिम विधि के अनुसार वसीयत का अर्थ, परिभाषा एवं वसीयत कौन कर सकता है?

वसीयत का अर्थ मुस्लिम विधि में वसीयत का तात्पर्य ऐसी घोषणा से है, जिसमें घोषणा करने वाला यह व्यवस्था करता है कि मृत्यु के पश्चात् उसकी सम्पत्ति या सम्पत्ति सम्बन्धी अन्य अधिकारों का अमुक ढंग से निस्तारण किया जाय. उपर्युक्त परिभाषा के अनुसार, वसीयत के दो मुख्य अनिवार्य तत्व है- वसीयत की प्रकृति वसीयत के … Read more

दान (हिबा) क्या है? | दान (हिबा) की परिभाषा, प्रकार एवं आवश्यक तत्व

दान (हिबा) की परिभाषा मुल्ला ने हिबा अर्थात् दान की परिभाषा इस प्रकार दी है- मुस्लिम विधि के अनुसार, “हिबा या दान सम्पत्ति का ऐसा तुरन्त अन्तरण है जिसको बिना किसी प्रतिदान के बदले में गया हो और जिसको दान प्राप्त करने वाला व्यक्ति स्वीकार कर ले”. फैजी ने हिबा की परिभाषा देते हुये कहा … Read more

दुष्प्रेरण क्या है? | दुष्प्रेरण की परिभाषा, आवश्यक तत्व, प्रकार एवं दुष्प्रेरक का दायित्व

दुष्प्रेरण की परिभाषा जब किसी अपराध को करने में अनेक व्यक्ति हिस्सा लेते हैं तो प्रत्येक व्यक्ति अलग-अलग ढंग से भिन्न-भिन्न तरीके से मदद करता है. अतः उसके आपराधिक दायित्व के निर्धारण के लिए प्रत्येक व्यक्ति के सहयोग की मात्रा एवं प्रकृति का अवधारणा किया जाय. भारतीय दण्ड संहिता (IPC) की धारा 107 के अनुसार, … Read more

मानव अधिकारों के विभिन्न सिद्धान्त

मानव अधिकार मानव अधिकार के सिद्धान्त? मानवीय अधिकार या मानवाधिकार वास्तव में वे अधिकार हैं जो प्रत्येक मनुष्य को केवल इस आधार पर मिलते हैं कि उसे मनुष्य के रूप में जीवित रहने के लिये उन अधिकारों की आवश्यकता होती है | मानव अधिकारों के विभिन्न सिद्धान्त मानवीय अधिकारों के सम्बन्ध में निम्नलिखित सिद्धांतों को … Read more

अभिवचन के नियम | अभिवचन के मूल नियम एवं सामान्य नियम

अभिवचन के मूल नियम अभिवचन के सिद्धांत? अभिवचन सम्बन्धी विधि को सूक्ष्म रूप से चार शब्दों में इस प्रकार रखा जा सकता है, “Plead facts not law” (तथ्यों का अभिवचन कीजिए, न कि विधि का). व्यवहार प्रक्रिया संहिता का आदेश 6 अभिवचन के निम्नलिखित मूल नियमों की व्यवस्था करता है. यह भी जाने : अभिवचन … Read more

लोकहित वाद क्या है? | लोकहित वाद कौन ला सकता है?

संविधान के अनुच्छेद 32 तथा 226 के अन्तर्गत उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय में सामान्य नियम के अनुसार, वही व्यक्ति वाद या आवेदन ला सकते हैं जिनके अधिकारों का अतिक्रमण हुआ हो, परन्तु पिछले वर्षों से न्याय की अवधारणा में परिवर्तन हुआ है जिसके अनुसार पीड़ित व्यक्ति के अलावा उसकी ओर से अन्य व्यक्ति उसके … Read more

भारतीय संविधान, CPC एवं CrPC में विधिक सहायता संबंधी प्रावधान

भारतीय संविधान में विधिक सहायता संविधान की प्रस्तावना में निहित है कि संविधान सभी को सामाजिक, राजनैतिक तथा आर्थिक न्याय प्रदान करायेगा. संविधान सभी को समान अवसर की बात भी करता है. भारतीय संविधान में इन्हीं उद्देश्यों को पाने के लिए भाग 3 में मूल अधिकारों को तथा भाग 4 में राज्य के नीति निदेशक … Read more

विधिक सहायता क्या है? | विधिक सहायता की परिभाषा, उद्देश्य एवं प्रमुख स्त्रोत

विधिक सहायता क्या है? विधिक सहायता प्रक्रिया को प्रायः सभी देशों में स्वीकार किया गया है परन्तु उसकी कोई निश्चित परिभाषा नहीं दी गई हैं. विधिक सहायता को न्यायालयों तथा विधिवेत्ताओं ने अवश्य परिभाषित करने की कोशिश की है | विधिक सहायता की परिभाषा ये परिभाषायें निम्नलिखित हैं- इथोक ब्लैकमैन के अनुसार, “किसी मामले में … Read more

राष्ट्रीय आयोग का गठन एवं क्षेत्राधिकार

राष्ट्रीय आयोग का गठन उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 20 के अनुसार, राष्ट्रीय आयोग का गठन निम्न प्रकार से होगा- परन्तु इस खण्ड के तहत कोई नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायाधीश की राय के बिना नहीं की जायेगी. परन्तु यह कि न्यायिक पृष्ठभूमि धारित करने वाले व्यक्ति सदस्यों के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं … Read more