अपकृत्य विधि में विभिन्न प्रकार के उपचार

अपकृत्य विधि में दो प्रकार के उपाचर उपलब्ध हैं- 1. न्यायिक उपचार न्यायिक उपचार (Judicial Remedies) वे उपचार हैं जो हमें न्याय प्रणाली द्वारा उपलब्ध कराये जाते हैं. इस प्रकार के उपाय हमें पहले से उपलब्ध नहीं रहते हैं वरन् क्षतिग्रस्त पक्ष को न्यायालय में दावा दायर करना पड़ता है, अतः यह कहा जा सकता … Read more

अपकृत्य क्या है? | अपकृत्य का अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएं

अपकृत्य का अर्थ टार्ट शब्द की उत्पत्ति फ्रांसीसी शब्द टॉर्टम (Tortum) से हुई है जिसका समानार्थी शब्द अंग्रेजों में ‘Wrong’ (अनुचित) एवं हिन्दी में ‘अपकृत्य’ होता है. अंग्रेजी भाषा में इस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम नार्मन-विधिशास्त्रियों ने किया जिनके अनुसार, ‘टॉर्ट’ (Tort) शब्द का अर्थ उन कार्यों से था जिसके करने से किसी व्यक्ति विशेष … Read more

बिना क्षति के हानि एवं बिना हानि के क्षति का सिद्धांत क्या है? दोनों में क्या अंतर है?

बिना क्षति के हानि इस सिद्धान्त के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को कोई हानि किसी अपकृत्य के कारण हुई है तो वह क्षतिपूर्ति के लिए वाद लाने का अधिकारी है, भले ही उसे अपकृत्य से वास्तविक क्षति एक पैसे की भी न हुई हो. इस प्रकार के अपकृत्ये स्वत: अभियोज्य होते हैं और उनमें केवल … Read more

प्राङ्न्याय का सिद्धांत | प्राङ्न्याय का अर्थ, उद्देश्य एवं आवश्यक तत्व

प्राङ्न्याय का अर्थ एवं उद्देश्य प्राङ्न्याय को अंग्रेजी में “रेस जुडिकाटा” कहते हैं जो कि एक लैटिन शब्द है, जिसका अर्थ “पहले से ही निर्णीत की गई वस्तु से है. विधि में प्राङ्न्याय के निम्नलिखित उद्देश्य हैं- 1. वाद की बहुलता को रोकना पूर्व न्याय का सिद्धान्त या प्राङ्न्याय के सिद्धान्त (Principle of Res Judicata) … Read more

दायित्व क्या है? | दायित्व का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं सिद्धान्त

दायित्व की परिभाषा दायित्व का अर्थ क्या है? दायित्व को व्यापक अर्थ में न्यायिक बन्धन कहा जाता है. मनुष्य का दायित्व उस समय पर उत्पन्न होता है जब उसके द्वारा किसी व्यक्ति के प्रति अपने कानूनी कर्त्तव्यों का उल्लंघन किया गया है. सामण्ड की राय के अनुसार, “दायित्व या उत्तरदायित्व आवश्यकता का वह बन्धन है … Read more

कर्तव्य क्या है? | कर्तव्य की परिभाषा एवं वर्गीकरण

कर्तव्य क्या है? कर्तव्य बाध्यकारिता की विषयवस्तु है. कर्तव्य आचरण को व्यक्त करता है. प्रत्येक कर्तव्य नैतिक बाध्यता पर आधारित होता है. कर्तव्य व्यवहार का तरीका निधारित करता है जिससे वास्तविक आचरण की वैधानिकता निर्धारित हो सके | कर्तव्य की परिभाषा विधिक कर्तव्य की परिभाषा विधिक अधिकार के सन्दर्भ में ही की जा सकती हैं. … Read more

अभिवचन में संशोधन क्या है? | अभिवचन में संशोधन के प्रकार एवं प्रभाव

अभिवचन में संशोधन व्यवहार प्रक्रिया संहिता के आदेश 6 में संशोधन सम्बन्धी प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है. अभिवचन में संशोधन (Amendment in Pleadings) तीन प्रकार से हो सकता है- यह भी जाने : अभिवचन का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य एवं निर्वचन संशोधन के प्रकार अभिवचन में संशोधन दो प्रकार का होता है- 1. अनिवार्य संशोधन … Read more

उत्पीड़न किसे कहते हैं? | उत्पीड़न की परिभाषा एवं आवश्यक तत्व

उत्पीड़न की परिभाषा उत्पीड़न क्या है? भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 15 के अनुसार, “उत्पीड़न (Coercion)” इस आशय से कि किसी व्यक्ति से कोई करार किया जाय, चाहे ऐसा कार्य करना या करने की धमकी देना है, जो भारतीय दण्ड संहिता (IPC, 1860 का 45) द्वारा निषिद्ध है अथवा किसी व्यक्ति पर, चाहे वह कोई … Read more

प्रस्थापना क्या है? | प्रस्थापना की परिभाषा, आवश्यक तत्व एवं प्रकार

प्रस्थापना अथवा प्रस्ताव की परिभाषा शब्द प्रस्थापना (प्रस्ताव) आंग्ल विधि के शब्द ‘Offer’ का पर्यायवाची हैं. इसे हम ‘प्रस्ताव’ भी कहते हैं. यह किसी करार अथवा संविदा का प्रथम चरण है. प्रस्थापना ही प्रतिग्रहण अर्थात स्वीकृति को जन्म देता है. संविदा अधिनियम 1872 की धारा 2 (a) के अनुसार, प्रस्थापना (प्रस्ताव) में एक व्यक्ति किसी … Read more

संविदा कल्प क्या है? | संविदा-कल्प की परिभाषा एवं विभिन्न प्रकार की कल्प संविदाएं

संविदा कल्प संविदा कल्प क्या है? सामान्यतः संविदाएं पक्षकारों के कार्य का परिणाम होती हैं. पक्षकार ही किसी बात को करने या करने से प्रविरत रहने का करार करते हैं और उन्हीं पर उसके अनुपालन का दायित्व रहता है. लेकिन कभी-कभी पक्षकारों के बीच प्रत्यक्ष रूप से ऐसा कोई करार नहीं किया जाता है. फिर … Read more