समन क्या है और समन की तामील की प्रक्रिया क्या है? | Summons

समन क्या है और समन की तामील की प्रक्रिया क्या है? | Summons

समन क्या है?

यह नैसर्गिक न्याय का सिद्धान्त है. समन एक ऐसा आदेश होता है जो किसी व्यक्ति को एक निश्चित तिथि, समय एवं स्थान पर उपस्थित होने के लिए दिया जाता है.

समन शब्द से आप क्या समझते हैं? समन एक ऐसी आदेशिका है जिसके माध्यम से अभियुक्त को लिखित रूप से इस बात के लिए निर्देशित किया जाता है कि वह निर्धारित स्थान, तिथि तथा समय पर न्यायालय में उपस्थित हो.

समन में निम्नलिखित दो बातों को सम्मिलित किया जाता है-

  1. समय, स्थान एवं तिथि।
  2. अपराध की प्रकृति।

समन के आवश्यक तत्व

CrPC की धारा 61 के अनुसार समन के लिए निम्नलिखित बातें आवश्यक है-

  1. वह लिखित होना चाहिए.
  2. वह दो प्रतियों में होना चाहिए.
  3. वह हस्ताक्षरित होना चाहिए.
  4. उस पर न्यायालय की सील होनी चाहिए.

1. यह लिखित होना चाहिए

समन लिखित रूप से होना चाहिये. इसमें प्रिन्टिंग लिथोग्राफी तथा शब्दों के दृश्यमान रूप में प्रस्तुत करने के अन्य सभी तरीके सम्मिलित हैं.

2. यह दो प्रतियों में होना चाहिये

समन पर पीठासीन अधिकारी या उच्च न्यायालय द्वारा निर्दिष्ट किसी अधिकारी के हस्ताक्षर होना चाहिए. आद्य हस्ताक्षर (Initial) एवं अपने नाम की मुद्रा के प्रयोग को आपत्तिजनक माना गया है.

3. उस पर न्यायालय की मुद्रा अंकित होनी चाहिये

प्रत्येक समन पर उस न्यायालय की मुद्रा अंकित को जानी चाहिये जिसने उसे जारी किया है |

समन की तामील की प्रक्रिया

समन की तामील कैसे होती है? CrPC की धारा 62 से 69 तक में समन की तामील की विभिन्न प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है-

1. व्यक्तिगत तामील

CrPC की धारा 62 के अन्तर्गत तामील की जिस रीति का उल्लेख किया गया है उसे हम व्यक्तिगत तामील कहते हैं. समन की तामील का यह सबसे अच्छा एवं उपयुक्त तरीका है. इसके अनुसार-

  1. तामील कराने वाले अधिकारी समन की तामील-
    • किसी पुलिस अधिकारी द्वारा.
    • राज्य सरकार द्वारा बनाये गये नियमों के अधीन रहते हुये समन जारी करने वाले न्यायालय के किसी अधिकारी द्वारा.
  2. तामील वैयक्तिक रूप से की जायेगी-
    • जहाँ ऐसा साध्य हो. समन की तामील उस व्यक्ति पर जिसके नाम पर जारी किया गया है उसे उसकी एक प्रति देकर वैयक्तिक रूप से की जायेगी.
  3. समन को दूसरी प्रति पर हस्ताक्षर किये जायेंगे-
    • तामील कराने वाले अधिकारी द्वारा अपेक्षा किये जाने पर वह व्यक्ति, जिस पर समन तामील किया गया है. दूसरी प्रति पर समन की प्राप्ति पर हस्ताक्षर करेगा. ऐसी हस्ताक्षरित प्रति न्यायालय को प्रेषित कर दी जाती है जो समन की तामील का प्रमाण मानी जाती है.

2. निगमित निकायों और समितियों पर समन की तामील

जब कोई समन किसी निगमित निकाय अथवा समिति के नाम जारी किया जाय तो CrPC की धारा 63 के अनुसार उसकी तामील-

  1. निगम के सचिव.
  2. स्थानीय प्रबन्धक.
  3. अन्य प्रधान अधिकारों पर की जा सकेगी.

ऐसे समय की तामील निगम के भारत में निगम के मुख्य अधिकारों के पत्ते से रेजिस्ट्रीकृत डाक द्वारा भेजे गये पत्र द्वारा भी की जा सकेगी.

3. जब समन किये गये व्यक्ति न मिल सकें तब तामील (विकसित तामील)

सामान्यतया समन की तामील उस व्यक्ति पर की जाती है जिसके नाम पर वह जारी किया गया है. लेकिन यदि ऐसा व्यक्ति सम्यक् तत्परता के बाद भी नहीं मिलता है तो CrPC की धारा 64 के अन्तर्गत समन को तामील ऐसे व्यक्ति के साथ रहने वाले उसके परिवार के किसी वयस्क पुरुष सदस्य पर की जा सकेगी एवं उस सदस्य के दूसरी प्रति पर हस्ताक्षर ले लिये जायेंगे. इसे विकसित तामील (Extended Service) कहा जाता है. परिवार के सदस्यों में सेवक (Servant) को सम्मिलित नहीं किया गया है. अतः किसी सेवक पर की गई तामील को वैध नहीं माना जाता है.

4. प्रतिस्थापित तामील

CrPC की धारा 65 में समन की तामील की एक रीति का उल्लेख किया गया है जिसका उपयोग उस समय किया जाता है जबकि तामील की उपर्युक्त तीनों रीतियों में से किसी के अन्तर्गत सुमन को तामील नहीं की जा सकती हो. ऐसी अवस्था में समन की तामील समन की एक प्रति उस व्यक्ति के निवास स्थान पर ऐसी जगह लगाकर की जा सकेगी जो सहज हो देखने में आ सके.

इस प्रकार को जाँच किये जाने पर यदि न्यायालय सन्तुष्ट हो जाता है तो वह उस समन को तामील हुआ मान लेगा या फिर नई रोति से तामील का आदेश दे सकेगा.

5. सरकारी सेवा पर तामील

जब समन ऐसे व्यक्ति के नाम पर जारी किया गया हो जो किसी सरकार की सक्रिय सेवा में है तो न्यायालय ऐसे समन को दो प्रतियों उस कार्यालय के प्रधान को भेजेगा जिसके अधीनस्थ वह व्यक्ति कार्य कर रहा है. ऐसी प्रतियाँ मिलने पर वह प्रधान उस व्यक्ति पर वैयक्तिक रूप से समन की तामील करायेगा एवं उसको एक प्रति न्यायालय को लौटा देगा. ऐसी तामील हस्ताक्षर एवं पृष्ठांकन करके की जायेगी.

6. स्थानीय सीमाओं के बाहर समन की तामील

जब समन किसी ऐसे व्यक्ति के नाम जारी किया गया हो जो कि उस न्यायालय के क्षेत्राधिकार के बाहर किसी स्थान पर निवास करता है तो समन जारी करने वाला न्यायालय ऐसे समन की प्रतियाँ उस मजिस्ट्रेट को भेजेगा जिसके क्षेत्राधिकार में वह निवास कर रहा है. वह मजिस्ट्रेट उस समन को सम्यक रीति से सम्बन्धित व्यक्ति पर तामील करायेगा.

7. साक्षी पर डाक द्वारा समन की तामील

CrPC की धारा 69 में साक्षियों को रजिस्ट्रीकृत डाक द्वारा समन भेजे जाने की व्यवस्था की गई है. इसके अनुसार साक्षियों को समन रजिस्ट्रीकृत डाक द्वारा ऐसे स्थान पर भेजा जायेगा जहाँ-

  1. वह मामूली तौर पर निवास करता है.
  2. कार्य करता है.
  3. लाभ के प्रयोजन से स्वयं कार्य करता है.

यदि डाक द्वारा भेजे गये समन को कोई ऐसा साक्षी लेने से इन्कार कर देता है तो डाक कर्मचारी के इस आशय के पृष्ठांकन के आधार पर न्यायालय ऐसे समन को तामील हुई मान लेगा. इस रीति का मुख्य उद्देश्य साक्षियों पर समन की तामील में होने वाले विलम्ब से बचना है |

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