समन क्या है? | समन कैसे जारी और तामील किया जाता है? | समन और वारंट में अंतर

समन क्या है? | समन कैसे जारी और तामील किया जाता है? | समन और वारंट में अंतर

समन क्या है?

समन (Summons) के प्रारूप का वर्णन CrPC की धारा 61 में किया गया है. इसके अनुसार न्यायालय द्वारा CrPC के अधीन जारी किया गया प्रत्येक समन लिखित रूप में और दो प्रतियों में, उस न्यायालय के पीठासीन अधिकारी द्वारा या अन्य ऐसे अधिकारी द्वारा, जिसे उच्च न्यायालय नियम द्वारा समय-समय पर निदिष्ट करे, हस्ताक्षरित होगा और उस पर उस न्यायालय की मुद्रा लगी होगी.

समन में साफ-साफ लिखा होना चाहिये

न्यायालय का नाम तथा बुलाये गये व्यक्ति को किस स्थान पर, किस दिन और किस समय हाजिर होना आवश्यक है. समन द्वारा बुलाये गये व्यक्ति को यह भी हिदायत होनी चाहिये कि बिना आज्ञा के वह न्यायालय न छोड़े और यदि वह मुकदमा जिसके लिये वह बुलाया गया है स्थगित कर दिया जाता है तो उसे स्थगित होने के बाद पड़ने वालो तारीख नोट करके न्यायालय छोड़ना चाहिये |

समन कैसे जारी और तामील किया जाता है?

CrPC के अधीन न्यायालय द्वारा जारी किया गया समन लिखित रूप में दो प्रतियों में तैयार किया जायगा और इस पर न्यायालय के पीठासीन अधिकारी अथवा ऐसे अधिकारी जिसे, हाईकोर्ट समय-समय पर नियमों द्वारा निर्देशित करे, के हस्ताक्षर होंगे तथा इस पर समन जारी करने वाले न्यायालय की मुहर लगी होगी.

समन की तामील कैसे की जाय?

CrPC की धारा 62 के अनुसार-

  1. प्रत्येक समन की तामील पुलिस अधिकारी द्वारा या ऐसे नियमों के अधीन, जो राज्य सरकार इस निमित्त बनाये, उस न्यायालय के, जिसने समन जारी किया है, किसी अधिकारी द्वारा या अन्य लोकसेवक द्वारा की जायेगी.
  2. यदि साध्य हो तो समन किये गये व्यक्ति पर समन की तामील उसे उस समन को दो प्रतियों में से एक का परिदान या निविदान करके वैयक्तिक रूप से की जायगी.
  3. प्रत्येक व्यक्ति, जिस पर समन को ऐसे तामीली की गयी है, यदि तामील करने वाले अधिकारी द्वारा ऐसी अपेक्षा की जाती है, तो दूसरी प्रति के पृष्ठ भाग पर उसके लिये रसीद हस्ताक्षरित करेगा.

समन की तामील

समन की तामील 7 प्रकार से की जा सकती है-

  1. व्यक्तिगत तामील
  2. विस्तारित तामील
  3. प्रतिस्थापित तामील
  4. सरकारी कर्मचारियों पर तामील
  5. निगम पर तामील
  6. न्यायालय की स्थानीय सीमा से बाहर तामील
  7. साक्षी पर समन को डाक द्वारा तामील.

1. व्यक्तिगत तामील (Personal Service)

CrPC की धारा 62 (2) के तहत समन द्वारा बुलाये गये व्यक्ति को समन की द्वितीय प्रति दी जाती है जो समन की प्राप्ति का उल्लेख समन की अन्य प्रति पर करेगा जो सम्बन्धित न्यायालय को भेज दी जायेगी. कानूनी दृष्टि से समन तामील होने का यह सर्वोत्तम तरीका है और ऐसी इच्छा को जाती है कि पहली बार में ही इसकी तामील हो.

2. विस्तारित तामील (Extended Service)

जहाँ समन किया गया व्यक्ति सम्यक् तत्परता बरतने पर भी न मिल सके वहाँ समन की तामील दो प्रतियों में से एक को उसके कुटुम्ब (Family) के उसके साथ रहने वाले किसी वयस्क पुरुष-सदस्य के पास व्यक्ति के लिये छोड़कर की जा सकती है और यदि तामील करने वाले अधिकारी द्वारा ऐसी अपेक्षा की जाती है तो जिस व्यक्ति के पास समन ऐसे छोड़ा जाता है वह दूसरी प्रति के पृष्ठभाग पर उसके लिये रसीद हस्ताक्षरित करेगा.

सेवक इस धारा के अर्थ में कुटुम्ब का सदस्य नहीं है. महानगर (Presidency Town) में समनित व्यक्ति के नौकर को समन की प्रति दे दी जाती है जो उसके साथ रहता है और वह व्यक्ति समनित व्यक्ति की ओर से समन की पीठ पर प्राप्तिसूचक हस्ताक्षर करेगा.

3. प्रतिस्थापित तामील

CrPC धारा 65 के तहत जब तामील सम्यक् तत्परता बरतने पर भी न की जा सके तो तामील करने वाला अधिकारी समन की दो प्रतियों में से एक को उस गृह या वास-स्थान के, जिसमें समन किया गया व्यक्ति मामूली तौर पर निवास करता है, किसी सहज दृश्यभाग में लगायेगा; और तब न्यायालय ऐसी जांच करने के पश्चात् जैसा वह ठीक समझे या तो यह घोषित कर सकता है कि समन की सम्यक् तामील हो गयी है या वह ऐसी रीत से नयी तामील का आदेश दे सकता है जिसे वह उचित समझे. ऐसी तामील प्रतिस्थापित तामील (Substituted Service) कही जाती है.

4. सरकारी या रेलवे कर्मचारी पर समन को तामील

CrPC धारा 66 के अनुसार, जहाँ समन किया गया व्यक्ति सरकार की सक्रिय सेवा में है वहाँ, समन जारी करने वाला न्यायालय मामूली तौर पर ऐसा समन दो प्रतियों में उस कार्यालय के प्रधान को भेजेगा जिसमें वह व्यक्ति सेवक है और तब वह प्रधान धारा 62 में उपबन्धित प्रकार से समन की तामील करायेगा और उस धारा द्वारा अपेक्षित पृष्ठांकन सहित उस पर अपने हस्ताक्षर करके उसे न्यायालय को लौटा देगा. ऐसा हस्ताक्षर सम्यक् तामील का साक्ष्य होगा.

5. निगमित निकायों और सोसाइटियों पर समन को तामील

CrPC धारा 63 के अनुसार, किसी निगम (Corporation) पर समन की तामील निगम के सचिव, स्थानीय प्रबन्धक या अन्य प्रधान अधिकारी पर तामील करके की जा सकती है या भारत में निगम के मुख्य अधिकारी के पते पर रजिस्ट्रोकृत डाक द्वारा भेजे गये पत्र द्वारा की जा सकेगी, जिस दिशा में तामील तब हुई समझी जायगी जब डाक से साधारण रूप से वह पत्र पहुँचता.

6. स्थानीय सीमाओं के बाहर समन की तामील

CrPC धारा 67 के तहत जब न्यायालय यह चाहता है कि उसके द्वारा जारी किये गये समन की तामील उसकी स्थानीय अधिकारिता के बाहर किसी स्थान में की जाए, तब वह मामूली तौर पर ऐसा समन दो प्रतियों में उस मजिस्ट्रेट को भेजेगा जिसकी स्थानीय अधिकारिता (Local jurisdiction) के अन्दर उसकी तामील की जानी है या समन किया गया व्यक्ति निवास करता है.

7. साक्षी पर डाक द्वारा समन की तामील

उपर्युक्त व्यवस्थाओं के बावजूद, साक्षी के लिए समन जारी करने वाला न्यायालय, ऐसा समन जारी करने के अतिरिक्त और उसके साथ-साथ, निदेश दे सकता है कि उस समन को एक प्रति की तामील साक्षी के उस स्थान के पते पर, जहाँ वह मामूली तौर पर निवास करता है या कारबार करता है या अभिलाभार्थ स्वयं काम करता है, रजिस्ट्रीकृत डॉक द्वारा की जाए.

जब साक्षी द्वारा हस्ताक्षर की गई तात्पर्यित अभिस्वीकृति या डाक कर्मचारी द्वारा किया गया तात्पर्यित यह पृष्ठांकन (Purported Endorsement) कि साक्षी ने समन लेने से इन्कार कर दिया है, प्राप्त हो जाता तो समन जारी करने वाला न्यायालय यह घोषित कर सकता है कि समन की तामील सम्यक् रूप से कर दो गयी है |

समन और वारंट में अंतर

  1. समन एक व्यक्ति को हाजिर होने के लिये एक आदेश है, किन्तु वारंट पुलिस की किया गया आदेश है कि वह वारन्ट में उल्लिखित व्यक्ति को गिरफ्तार करें.
  2. समन की तामील से बचना दण्डनीय है, किन्तु वारंट की तामील से बचना दण्डनीय नहीं है.
  3. समन की दूसरी की गई प्रतिलिपि (Duplicate) मकान के सहज दृश्य भाग में चिपका दी जानी चाहिए, जिसमें सम्बन्धित व्यक्ति रह रहा है, किन्तु वारंट की तामील इस प्रकार से नहीं की जा सकती है |

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