स्थायी आदेश क्या है? | स्थायी आदेशों का प्रारूप प्रस्तुत करने के लिए क्या प्रक्रिया है?

स्थायी आदेश क्या है? | स्थायी आदेशों का प्रारूप प्रस्तुत करने के लिए क्या प्रक्रिया है?

स्थायी आदेश क्या है?

स्थायी आदेश (Standing Order) स्थायी आदेशों से तात्पर्य इस अधिनियम की अनुसूची में वर्णित विषयों के सम्बन्ध में नियम से है.

अर्थात स्थाई आदेश शब्द से इस अधिनियम की अनुसूची में वर्णित मामलों के सम्बन्ध में नियमावली से है. प्रत्येक नियोजक इस अधिनियम की अनुसूची में उपबन्धित किसी मामले के सम्बन्ध में स्थायी आदेशों में आवश्यक उपबन्ध करने के लिए बाधित होगा.

स्थायी आदेशों के प्रमाणीकरण की शर्तें

स्थायी आदेश प्रमाणित किये जाने योग्य (Certificable) होते हैं, यदि-

  1. स्थायी आदेशों के प्रालेख में उन सभी विषयों को सम्मिलित कर लिया गया है, जो कि अधिनियम की अनुसूची में उल्लिखित हैं, और औद्योगिक प्रतिष्ठान पर प्रभावी होते हैं,
  2. प्रालेख स्थायी आदेश अन्यथा अधिनियम की व्यवस्थाओं के अनुसार है जैसा कि इस अधिनियम की धारा 4 में उल्लिखित है.

प्रालेख स्थायी आदेश प्रमाणित नहीं होंगे यदि वे आदर्श स्थायी आदेश से मेल न खाते होंगे, लेकिन यह आवश्यक नहीं है कि वे अक्षरश: उसी रूप में हों.

प्रमाणक अधिकारी अथवा अपीलीय प्राधिकारी का यह कर्तव्य है कि वह स्थायी आदेश के औचित्य (Faimess) या न्यायोचितता (Reasonableness) पर अपना निर्णय प्रदान करे.

स्थायी आदेशों का प्रमाणीकरण

जिस तिथि से यह अधिनियम किसी औद्योगिक न्यायालय में लागू हो जाता है, उस तिथि से 6 माह के अन्तर्गत नियोजक अपने औद्योगिक व्यवस्थापन में ग्रहण करने के लिये अपने द्वारा प्रस्तावित स्थायी आदेश के प्रारूप की पाँच प्रतियाँ प्रमाणक अधिकारी को प्रस्तुत करेगा.

इसकी प्राप्ति के 15 दिन की अवधि में जो कुछ आपत्तियां हो सकती हैं उन्हें दिया जा सकता है.

स्थायी आदेश का प्रालेख (Draft) प्राप्त होने के बाद प्रमाणक अधिकारी द्वारा प्रालेख को प्रमाणीकरण करने का अधिकार अधिनियम की धारा 5 में दिया गया है, जिसके अनुसार-

  1. धारा 3 के अन्तर्गत प्रालेख स्थायी आदेश को प्रस्तुत करने के बाद, प्रमाणक-अधिकारी (Certifying Officer) प्रालेख की एक प्रति उस प्रतिष्ठान की ट्रेड यूनियन के पास यदि कोई है तो, या जहां कर्मकारों की कोई ट्रेड यूनियन है उस दशा में कर्मकारों के पास भेजेगा. प्रमाणक-अधिकारी ट्रेड यूनियन या कर्मकारों से प्रालेख पर आपत्तियाँ माँगेगा. इसकी प्राप्ति के 15 दिन के भीतर आपत्तियां प्रस्तुत की जा सकती हैं.
  2. प्रमाणक अधिकारी नियोजक तथा कर्मकारों के प्रतिनिधियों को सुने जाने का अवसर प्रदान करेगा तथा उसके बाद वह इस बात का निश्चय करेगा कि क्या प्रालेख स्थायी आदेश में कोई ऐसा परिवर्तन (Modification) या कुछ जोड़ना आवश्यक है या नहीं, जिससे कि उसे अधिनियम के अन्तर्गत प्रमाणित किया जा सके.
  3. प्रमाणक अधिकारी फिर प्रारूप स्थायी आदेश को, उनमें कुछ संशोधन करने के पश्चात् प्रमाणित करेगा और धारा 5 की उपधारा (2) के अन्तर्गत निर्धारित ढंग से प्रमाणित स्थायी आदेशों की प्रतियां तथा उपधारा (2) के अन्तर्गत किये गये अपने आदेशों की प्रतियाँ नियोजक और ट्रेड यूनियन को भेजेगा या श्रमिकों के अन्य स्वीकृत प्रतिनिधियों को भेजेगा. प्रमाणित स्थायी आदेशों को सभी कर्मकारों पर बाध्यता युक्त माना जाता है, भले ही स्थायी आदेशों को प्रमाणित किये जाने के पूर्व से मूलतः नियोजित (Employed) हों या उसके बाद नियोजन में आये हों.

स्थायी आदेशों को लागू होने की तिथि

प्रमाणक-अधिकारी द्वारा प्रमाणित स्थायी आदेशों को यदि उनके सम्बन्ध में अपील करने का विकल्प नहीं लिया गया है, तो उस तिथि से 30 दिन बीत जाने के बाद लागू किया हुआ मान लिया जायेगा, जिस तारीख को उनकी प्रमाणित प्रतियाँ भेज दी जाती हैं. अपील की जाने की स्थिति में अपील प्राधिकारी द्वारा प्रतियां भेजे जाने की तिथि से सात दिन के बाद उन आदेशों को लागू हुआ मान लिया जायेगा. लागू होने बाद स्थायी आदेशों को सभी वर्तमान कार्यकारों तथा प्रतिष्ठान में आगे नियोजित किये जाने वाले सभी कर्मकार (Workmen) पर प्रभावी माना जायेगा.

स्थायी आदेशों का रजिस्टर

इस अधिनियम के अन्तर्गत अन्तिम रूप से प्रमाणित किये गये सभी स्थायी आदेशों की एक प्रति को प्रमाणक-अधिकारी द्वारा इस निमित्त विहित किये गये प्रारूप में एक रजिस्टर में फाइल किया जायेगा. विहित फीस (Prescribed Fees) के दिये जाने पर ऐसे आदेशों की प्रतियां उस व्यक्ति को दे दी जायेंगी जो आवेदन करता है |

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