भारत में केन्द्रीय बैंकों की उत्पत्ति, विकास, लक्षण एवं कार्य

भारत में केन्द्रीय बैंकों की उत्पत्ति, इतिहास एवं लक्षण

बैंक शब्द की उत्पत्ति

बैंक शब्द की उत्पत्ति के सम्बन्ध में मतभेद है. एक मत के अनुसार, बैंक शब्द इटली के Banco से बना जो स्वयं Bancus या Banque से उत्पन्न हुआ है जिसका अर्थ Bench है. प्राचीन यूरोप भारत एवं अन्य देशों में साहूकार बेंचों पर बैठकर अपना व्यवसाय करते थे और व्यवसाय बंद होते ही बेंचों को तोड़ देते थे. दूसरे मत के अनुसार, जर्मन शब्द Banck से लिया गया है. जिसका अर्थ संयुक्त स्कंध कोष तीसरे मत के अनुसार, फ्रांसीसी शब्द Banke और अंग्रेजी शब्द Bank से लिया गया है. अब हिन्दी शब्दावली में Bank शब्द को ग्रहण कर लिया गया है.

2000 BC के पूर्व बेबीलोनियन्स ने बैंक पद्धति का विकास किया था. इस तरह के कार्य के लिए मन्दिरों को बैंकों के रूप में प्रयोग करने के प्रमाण मिलते हैं तथा वहाँ के बड़े मन्दिरों Ephesus एवं Delphi बैंकिंग पद्धति के बड़े बैंक की श्रेणी रहे हैं. एडवर्ड तृतीय के शासन में मुद्रा परिवर्तन का कार्य उस समय बैंकों का एक मुख्य कार्य था जो Royal Exchanger क्राउन के फायदे के लिए किया जाता है. आधुनिक बैंकिंग का इतिहास एलिजावेथ के समय से अमेरिका से सोना आगमन से होता है. 1694 में बैंक आफ इंग्लैण्ड की स्थापना हुई तथा पुनः 1708 में नोट निर्गमन का एकाधिकार बैंक आफ इंग्लैण्ड को दिया गया |

भारत में बैंकिंग का इतिहास

भारत में प्राचीन बैंकिंग का कोई खास इतिहास नहीं रहा. बम्बई और कलकत्ता में ईस्ट इंडिया कम्पनी कुछ एजेन्सी हाउसेस स्थापित किये गये थे जो थोड़ा बहुत बैंकों का कार्य करते थे. एजेन्सी हाउस असफल हो गये और उनका कारबार बन्द हो गया.

1809 में बैंक आफ बंगाल 1823 में इसे नोट निर्गमन का अधिकार दिया गया. 1840 में बैंक आफ बाम्बे तथा 1843 में बैंक आफ मद्रास की स्थापना की गयी.

1860 का वर्ष भारत में पब्लिक बैंकों के इतिहास का नया युग था क्योंकि ज्वांइट स्टाक कम्पनियों के सम्बन्ध में इस साल प्रथम बार सीमित दायित्व की सुविधा प्रदत किया गया था. इस सुविधा से भारत में बैंकों की अत्यधिक संख्या बढ़ गई लेकिन सट्टेबाजी कुप्रबन्ध तथा कपट के कारण असफल हो गयी. 1862 से 1865 का समय कम्पनियों के लिए संकट का समय था. इसी बीच 1863 में बैंक आफ बाम्बे का समापन भी हुआ हालांकि 1863 में बैंक आफ बाम्बे फिर से आरम्भ हुआ.

इसी के कारण 1865 से 1870 में केवल एक इलाहाबाद बैंक की स्थापना हुई. भारत तथा विदेशी व्यापार में अनिश्चितता का दौर उत्पन्न हुआ जो 1893 में समाप्त हुआ और भारतीय टकसाल बन्द हुए. इसी के कारण 1895 में पंजाब नेशनल बैंक की स्थापना हुई तथा 1901 में पिपुल्स बैंक आफ इंडिया की स्थापना की गयी. इसी बीच स्वदेशी आन्दोलन शुरू हुए जिससे प्रभावित होकर लोगों ने अंग्रेजी बैंकों का बहिष्कार किया इसके कारण भारतीय बैंकों को प्रोत्साहन मिला. 1906 से 1913 के बीच भारतीय बैंकों की स्थापना बहुत अधिक हुई इसमें पीपुल्स बैंक आफ इण्डिया, बैंक आफ इण्डिया, सेन्ट्रल बैंक आफ इण्डिया, बैंक आफ मैसूर, बड़ौदा बैंक आदि महत्वपूर्ण थे.

भारतीय इम्पीरियल बैंक अधिनियम 1920 के द्वारा 1921 को सभी प्रेसीडेन्सी बैंकों को समामेलित कर इम्पीरियल बैंक आफ इण्डिया की स्थापना हुई. इन बैंकों को नोटों का निर्गमन लोक ऋणों का प्रबन्ध आदि के अधिकार थे.

इम्पीरियल बैंक आगे चलकर 1955 में स्टेट बैंक आफ इण्डिया का रूप लिया. इस समय तक कोई केन्द्रीय बैंक नहीं था. इसकी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए 1 अप्रैल 1935 को केन्द्रीय बैंक के रूप में भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना 1934 के अधिनियम द्वारा किया गया.

आरम्भ में बैंकिंग व्यवसाय के विनियमन के सम्बन्ध में परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 में ही कुछ प्रावधान थे इससे 1913 में कम्पनी अधिनियम में भी अलग से बैंकिंग व्यवसाय से सम्बन्धित प्रावधान बनाये गये स्वतंत्रता की प्राप्ति पर बैंकों के व्यवसाय पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा और उसके कारण अधिकतर बैंक असफल हो गये जनहित और आर्थिक विकास के प्रयोजन से अधिक सहायता देने के लिए भारत सरकार ने 1949 में एक अलग से भारतीय बैंकिंग कम्पनी अधिनियम पारित किया और इसी अधिनियम द्वारा बैंकों का नियन्त्रण होता है.

1965 में संशोधन कर भारतीय बैंकिग कम्पनी अधिनियम का नाम परिवर्तित कर भारतीय बैंकिंग विनियमन अधिनियम नाम दिया गया. वर्तमान में यही अधिनियम लागू है |

बैंकों के लक्षण

बैंकिंग कम्पनियों के लक्षण निम्नलिखित हैं-

  1. कारवार बैंकिंग कम्पनियों द्वारा ही किया जायेगा. बैंकिंग कम्पनी निगमित होनी चाहिए क्योंकि निर्गमित कम्पनी हो बैंकिंग व्यापार कर सकती हैं.
  2. जनता से निक्षेप प्राप्त करना भी बैंकिंग कम्पनियों के लक्षण है.
  3. माँग पर प्रतिसंदाय करना भी बैंकिंग कम्पनी के लक्षण है अर्थात जनता अपनी जमा धनराशि को किसी भी समय मांग पर वापस प्रतिसंदाय करने का अधिकार रखती है या शर्तों के अनुसार, वापस प्राप्त करने का अधिकार रखती है.
  4. बैंक द्वारा आहरण की सुविधा बैंकिंग व्यवसाय का प्रमुख लक्षण है.
  5. बैंकिंग कारोबार करना बैंकिंग कम्पनियों के मुख्य लक्षण हैं |

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