पृष्ठांकन की परिभाषा एवं प्रकार

पृष्ठांकन की परिभाषा एवं प्रकार

पृष्ठांकन की परिभाषा

जब किसी लिखत का इस प्रकार अन्तरण किया जाता है कि प्राप्त करने वाला व्यक्ति उसका धारक हो जाय तो इसे पृष्ठांकन (Pagination) कहा जाता है.

परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 15 में पृष्ठांकन को बताया गया है. धारा 15 के अनुसार, जब परक्राम्य के प्रयोजन से परक्राम्य लिखत का रचयिता या धारक लिखत पर हस्ताक्षर कर देता है तथा स्टाम्प पर भी हस्ताक्षर कर देता है तो कहा जाता है पृष्ठांकन हो गया.

जैसे अन्य विधियों में अन्तरण शब्द का प्रयोग हुआ है उसी तरह परक्राम्य विधि में परक्रामण का प्रयोग किया जाता है. पृष्ठांकन परक्रामण का एक तरीका है. धारा 48 में पृष्ठांकन द्वारा परक्रामण बताया है. इस धारा में यह कहा गया है कि धारा 58 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए उसके पृष्ठांकन तथा परिदान द्वारा परक्रामण हो सकता है |

पृष्ठांकन कौन कर सकता है?

धारा 51 के अनुसार, परक्राम्य लिखत का हर एकल रचयिता लेखीवाल, पाने वाला, पृष्ठांकिती, कई संयुक्त रचयिताओं, लेखीवालों, पाने वाले द्वारा पृष्ठांकित कर सकेंगे |

पृष्ठांकन के प्रकार

पृष्ठांकन कई प्रकार का होता है जो निम्न हैं-

1. निरंक पृष्ठांकन

धारा 16 (1) के अनुसार, जब पृष्ठांकन कर्ता लिखत पर केवल अपना नाम हस्ताक्षरित करता है तो इसे निरंक पृष्ठांकन (Blank Indorsement) कहा जाता है. ऐसे परक्राम्य का प्रभाव यह होता है कि आर्डर लिखत बेयरर लिखत में बदल जाता है. तथा लिखत तब तक बेयरर बना रहता है जब तक कि धारक निरंक पृष्ठांकन को पूर्ण पृष्ठांकन (Full Indorsement) में न बदल दे.

2. पूर्ण पृष्ठांकन

धारा 16 (1) के अनुसार, जब पृष्ठांकनकर्ता अपने हस्ताक्षर के पूर्व किसी ऐसे व्यक्ति का नाम जोड़ दे जिसको वह भुगतान देना चाहता है तो इसे पूर्ण पृष्ठांकन (Full Indorsement) कहते हैं.

उदाहरण, मान लीजिए कि ‘A’ एक चैक का धारक है और वह ‘B’ के प्रति पृष्ठांकन करना चाहता है. इस उद्देश्य को पूरा होने के लिए पृष्ठांकन इस प्रकार होगा भुगतान ‘B’ या उसके अदेशानुसार किसी अन्य व्यक्ति को दिया जाय वह चाहे तो आदेशानुसार शब्द न लगाये. इससे आशय स्पष्ट होता है.

3. प्रतिबन्धित पृष्ठांकन

पृष्ठांकन से पृष्ठांकिती लिखत का स्वामी हो जाता है तथा पृष्ठांकिती धारा 50 के अनुसार, उसे पृष्ठांकन करने का भी अधिकार मिल जाता है. परन्तु जब पृष्ठांकन करने का अधिकार पृष्ठांकन द्वारा ही समाप्त कर दिया गया हो तब इसे प्रतिबन्धित पृष्ठांकन (Restrictive Indorsement) कहते हैं. प्रतिबन्धित पृष्ठांकन का प्रभाव यह होता है कि पृष्ठांकिती को भुगतान का तो अधिकार मिल जाता है परन्तु लिखत को किसी अन्य व्यक्ति को देने का अधिकार नहीं मिलता.

4. सशर्त पृष्ठांकन

धारा 52 के अन्तर्गत पृष्ठांकन करने वाला (पृष्ठांकनकर्ता) यदि कोई शर्त लगा देता है तो उसे सशर्त पृष्ठांकन (Conditional Indorsement) कहा जाता है.

उदाहरण, के लिए वह यह कह सकता है कि ‘A’ को भुगतान माल पहुँचने दिया जाय. इस प्रकार के शर्त से उस व्यक्ति के दायित्व पर किसी भी तरह का प्रभाव नहीं पड़ता है जिसको देय होने पर लिखत का भुगतान देना है.

5. अधूरा पृष्ठांकन

धारा 56 के अनुसार, परक्राम्य अधिनियम का कोई भी लिखत जिससे यह तात्पर्य हो कि लिखत पर शोध्य रकम के कुछ भाग को ही अन्तरण करना है परक्रामण के प्रयोजन के लिए विधिमान्य नहीं है. किसी भी लिखत का अधूरे रूप से पृष्ठांकन नहीं किया जा सकता है.

6. सेन्स रिकोर्स पृष्ठांकन

धारा 52 के अनुसार, यदि पृष्ठांकनकर्ता अपने को दायित्व से बचाना चाहता है तो इस बात का आशय स्पष्ट कर देता है. उदाहरण, के लिए वह पृष्ठांकन के साथ यह लिख सकता है कि भुगतान ‘A’ को किया जाय परन्तु मेरा कोई दायित्व नहीं होगा |

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