पेटेंट का अर्थ, परिभाषा एवं पेटेंट अधिनियम की विशेषताएं?

पेटेंट का अर्थ, परिभाषा एवं पेटेंट अधिनियम की विशेषताएं?

पेटेंट का अर्थ

पेटेंट क्या है? पेटेंट का अर्थ इस बात से लगाया जा सकता हैं कि पेटेंट एक अधिकार के रूप में स्वीकृत किया जाने वाला राज्य अनुदान है जो आविष्कार को एक निश्चित समय के लिये उसके आविष्कार का उपयोग करने के लिए प्रदान किया जाता है.

‘पेटेंट’ शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के ‘पैटीयर’ शब्द से हुई है जिसका अर्थ है-खुला रहना, प्रकट करना. पेटेंट शब्द ‘लेटर्स पेटेंट’ का संक्षिप्त रूप है जिसका अर्थ सम्प्रभु शक्ति द्वारा एक आविष्कारकर्ता को उसके आविष्कार को सीमित अवधि के लिये बनाने उपयोग करने और विक्रय करने के अनन्य अधिकार के रूप में कुछ अधिकार प्रदान करने वाले लिखित अथवा मुद्रित विलेख से है |

पेटेंट की परिभाषा

पेटेंट की परिभाषा क्या है? पेटेंट अधिनियम, 1970 की धारा 2(1)(ड) के अन्तर्गत ‘पेटेंट’ शब्द को इस प्रकार परिभाषित किया गया है ‘पेटेंट’ से इस अधिनियम के अधीन किसी आविष्कार के लिए स्वीकृत पेटेंट अभिप्रेत है. पेटेंट आविष्कार को सारवान अधिकार हस्तान्तरित करता है. पेटेंट के माध्यम से आविष्कारकर्ता कुछ मूर्त अधिकार प्राप्त करता है जिसका कुछ मूल्य होता है. पेटेंट आविष्कारकर्ता को प्रतिस्पद्धों से संरक्षण प्रदान करता है.

पेटेण्ट की अवधि के दौरान पेटेंटी को प्राप्त अनन्य अधिकार का उसकी सहमति या आज्ञा के बिना किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा उपयोग कर अतिलंघन माना जाता है और ऐसा किये जाने पर पेटेंटी पेटेंट अधिनियम, 1970 के प्रावधानों के अन्तर्गत अतिलंघनकारी के विरुद्ध कार्यवाही संस्थित करते हुए उपचार प्राप्त कर सकता है.

पेटेंट एक बौद्धिक सम्पदा है जिसमें आविष्कारकर्ता बुद्धि, पूँजी और श्रम का प्रयोग करते हुये कुछ नवीन और उपयोगी उत्पाद की रचना या प्रक्रिया की खोज भी करता है. पेटेंटी का आविष्कार पर अनन्य साम्पत्तिक अधिकार, बौद्धिक सम्पदा अधिकार कहलाता है. पेटेंटी बौद्धिक सम्पदा के प्रति उसी प्रकार का व्यवहार करने के लिये अधिकृत होता है जिस प्रकार किसी अन्य चल सम्पत्ति का स्वामी ऐसी सम्पत्ति के बारे में करने के लिए अधिकृत होता है. ऐसे पेटेंटीकृत आविष्कार का विक्रय अनुज्ञप्ति या समनुदेशन वास्तविक तौर पर पारस्परिक सहमति और स्वामित्व के रूप में मूल्यवान प्रतिफल के लिये होता है.

पेटेंट जिसे मूर्त सम्पत्तियों चल एवं अचल के एक प्रकार के रूप में मान्यता प्राप्त है. पेटेण्ट निजी सम्पत्ति का अधिकार है और इसी रूप में इसका प्रयोग होता है. निजी सम्पत्ति की भांति पेटेंट अधिकारों का व्यवहार समनुदेशन, बंधक, अनुज्ञप्ति या अन्य प्रकार से किया जा सकता है. पेटेंट अधिनियम, 1970 के अन्तर्गत ऐसे सभी व्यवहारों के बारे में मूल नियमों को संहिता का प्रावधान किया गया है. पेटेंटी आविष्कार का उपयोग करने के लिये किसी अन्य व्यक्ति को अनुज्ञप्ति भी प्रदान कर सकता है.

विश्वनाथ प्रसाद राधेश्याम बनाम हिन्दुस्तान मेण्टल इण्डस्ट्रीज (1979, 2 SCC 511) के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पेटेंट विधि का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान, नवीन प्रौद्योगिकी और औद्योगिक प्रगति को प्रोत्साहित करना है. पेटेन्टीकृत उत्पाद या प्रक्रिया का एक सीमित अवधि के लिये स्वामित्व रखने, उपयोग करने या विक्रय करने के अनन्य विशेषाधिकारों का प्रदान किया जाना वाणिज्यिक उपयोग के आविष्कारों को प्रेरित करता है. पेटेंट कार्यालय का प्रकटीकरण एकाधिकार प्रदान किये जाने का मूल्य होता है जो एकाधिकार को निश्चित अवधि बीत जाने के पश्चात सार्वजनिक अधिकार क्षेत्र में संक्रान्त हो जाता है |

पेटेंट अधिनियम की विशेषतायें

पेटेंट अधिनियम, 1970 की विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

  1. पेटेंट एक बौद्धिक सम्पदा है.
  2. पेटेंट आविष्कारकर्ता को सारवान अधिकार हस्तान्तरित करता है.
  3. पेटेंट आविष्कारकर्ता को प्रतिस्पद्धों से संरक्षण प्रदान करता है.
  4. पेटेंट आर्थिक लाभ का स्रोत है.
  5. पेटेंटी पेटेंट अधिनियम, 1970 के प्रावधानों के अन्तर्गत पेटेण्ट की अवधि के दौरान उसको सम्मति या अनुज्ञप्ति के बिना किसी अन्य के द्वारा उपयोग करने पर अतिलंघन माना जाता है जिसके लिए पेटेंटी को उपचार प्राप्त करने हेतु कार्यवाही करने का अधिकार प्राप्त है.
  6. पेटेंट किसी आविष्कार के बारे में प्राप्त होने वाला विशिष्ट अधिकार है.
  7. आविष्कार पेटेंट की विषय-वस्तु होता है जिसे पेटेंट के माध्यम से संरक्षण प्रदान किया जाता है. पेटेंट अधिनियम, 1970 की धारा 2 (1) (ञ) में ‘आविष्कार’ शब्द को परिभाषा दी गई है.
  8. पेटेंट एक बौद्धिक सम्पदा है जिसे मूर्त सम्पत्तियों, चल एवं अचल के रूप में मान्यता प्राप्त है.
  9. पेटेंटी द्वारा अपने अनन्य अधिकार का प्रयोग पेटेंट की अवधि 20 वर्ष तक कर सकता है और इसको आगे बनाये रखने हेतु नवीकरण आवश्यक होता है.
  10. पेटेण्ट अधिनियम, 1970 की धारा 70 पेटेंटी को अनुज्ञप्ति का अधिकार प्रदान करती है.
  11. पेटेंट (संशोधन) अधिनियम, 2005 के अन्तर्गत पेटेंट के आवेदनों की जाँच और निर्णय के लिए फैसला अब 9 वर्ष के बजाय 42 वर्ष कर दिया गया.
  12. नये संशोधन कानून के तहत पेटेंट कानून में सरकार ने यह भी प्रावधान किया है कि दवा नीति के अनुरूप किसी दवा को मूल्य नियंत्रण के दायरे में लाया जा सकता है जिसके तहत मूल्य सरकार के नियमों के तहत तय होंगे.
  13. नयाँ पेटेंट व्यवस्था दवा, रसायनों, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर तकनीकों पर प्रभावी होगी.

अतः उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखकर यह कहा जा सकता है कि भारतीय पेटेंट अधिनियम (यथा संशोधित 2005) एक सभ्य राष्ट्र के रूप में भारत की राष्ट्रीय आवश्यकताओं एवं उसके वैश्विक दायित्वों के मध्य संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है. भारतीय विधायिका ने यह सुनिश्चित करने के लिए हमेशा अवसर के अनुकूल अपनी भूमिका का निर्वाह किया है कि भारतीय वैज्ञानिकों एवं अन्य आविष्कारकों के साथ-साथ भारत के लोगों के हितों को भी महत्तम संभव सीमा तक रखा जाये |

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