भारत निर्वाचन आयोग के कार्य और शक्तियां?

निर्वाचन आयोग के कार्य और शक्तियां क्या है?

निर्वाचन आयोग क्या है? निर्वाचन आयोग भारत में इस संविधान के द्वारा लोकतान्त्रिक सरकार स्थापित की गई है. अतः प्रत्येक पाँचवे वर्ष जनता के प्रतिनिधियों का चुनाव किया जाता है. इस कार्य के लिए संविधान ने अनुच्छेद 324 के अन्तर्गत भारत में एक निर्वाचन आयोग की स्थापना किया है. यह आयोग एक स्वतन्त्र निकाय है, जिसमें एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य उतने निर्वाचन आयुक्त हो सकते हैं जितने कि राष्ट्रपति समय-समय पर नियुक्त करे। निर्वाचन आयोग के परामर्श से आयोग की मदद के लिए राष्ट्रपति ऐसे प्रादेशिक निर्वाचन आयोग भी नियुक्त कर सकता है, जैसा कि वह आवश्यक समझे।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति, संसद द्वारा बनाये गये कानून के अधीन करता है. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी प्रकार से हटाया जा सकता है, जिस प्रकार से उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधिश को हटाया जा सकता है. किन्तु उसकी नियुक्ति के पश्चात उसकी सेवा शर्तो में ऐसा कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता है जो उसको अलाभकारी हो।

निर्वाचन आयुक्तों और प्रादेशिक निर्वाचन आयुक्तों की सेवा शर्तों, सेवाकाल के लिए राष्ट्रपति नियम बना सकता है, किन्तु निर्वाचन आयुक्त या प्रादेशिक आयुक्त को वह बिना मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश से हटा नही सकता है. इस प्रकार संविधान निर्वाचन आयोग के पदाधिकारियों के पदों और सेवाओं को पूर्ण संरक्षण प्रदान करता है, ताकि वे निर्भय होकर निष्पक्षता से अपने कर्तव्यों का पालन कर सके।

निर्वाचन आयोग के कार्य और शक्तियां

निर्वाचन आयोग का क्या काम है? अनुच्छेद 324 के अन्तर्गत निर्वाचन आयोग के कार्य और शक्तियां निम्नलिखित हैं-

  1. संसद और राज्यों के विधान मण्डलों के निर्वाचन के लिए निर्वाचक नामावली की तैयारी का अधीक्षण, निर्देशन और नियन्त्रण करना।
  2. उक्त कथित निर्वाचनों का संचालन करना।
  3. राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचनों का संचालन करना।
  4. संसद और राज्यों के विधान मण्डलों के निर्वाचन सम्बन्धी सन्देहों और विवादों के निर्णय के लिए निर्वाचन- न्यायाधिकरण की नियुक्ति करना।
  5. संसद तथा राज्यों के विधान मण्डलों के सदस्यों की अनर्हताओं के प्रश्न पर राष्ट्रपति और राज्यपालों को परामर्श देना।

संसद ने, अनुच्छेद 327 द्वारा प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950, राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति निर्वाचन अधिनियम 1952, परिसीमन आयोग अधिनिय 1952, आदि कानून बनाये है और उन्ही कानूनों के प्रावधानों के अनुसार निर्वाचन आयोग अपना कार्य करता है। अभी तक भारत में जितने आम चुनाव या उप-चुनाव हुए हैं, सभी में निर्वाचन आयोग के निष्पक्ष कार्य की प्रशंसा की गई है. निर्वाचन आयोग अपने कर्तव्यों का पालन सुचारू रूप से बिना किसी प्रशासनिक हस्तक्षेप के करता।

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