भूमिगत अतिचार : अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं आवश्यक तत्व

भूमिगत अतिचार : अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं आवश्यक तत्व

भूमिगत अतिचार

“दूसरे की भूमि पर वेजा (Unwarranted) प्रवेश अथवा किसी भी भूमि के कब्जे में हस्तक्षेप का सीधा एवं अव्यवहित्त (immediate) कृत्य भूमिगत अतिचार कहा जाता है.”

अण्डरहिल के अनुसार, अतिचार के अपकृत्य के लिए न बल प्रयोग आवश्यक है, न अवैध इरादा, न वास्तविक क्षति, और न ही संलग्न किसी वस्तु को तोड़ना. “व्यक्तिगत सम्पत्ति पर प्रत्येक आक्रमण (invasion) वह कितना भी छोटा क्यों न हो, अतिचार माना जाता है.”

सामान्य अर्थों में अतिचार का अर्थ अनधिकार प्रवेश से है जो कब्जा दखल में अनुचित रूप से शीघ्र बाधा उत्पन्न करना माना जाता है. इस प्रकार भूमिगत अतिचार किसी व्यक्ति की भूमि पर अनधिकार प्रवेश करने अथवा उसकी भूमि के आधिपत्य में किसी प्रकार का हस्तक्षेप करने को कहते हैं. “अन्य व्यक्ति की सम्पत्ति के प्रति किया गया छोटे से छोटा अनुचित कृत्य अतिचार के अन्तर्गत आता है, बशर्ते कि उससे सम्पत्ति के स्वामी के आधिपत्य में हस्तक्षेप होता हो.” |

अतिचार के आवश्यक तत्व

भूमिगत अतिचार में तीन बातें होनी चाहिये-

  1. वादी की भूमि पर प्रवेश;
  2. वहाँ पर उपस्थिति;
  3. कोई ऐसा कृत्य करना जिससे वादी के आधिपत्य में बाधा पहुँचे.

भूमिगत अतिचार की विशेषताएँ

  1. भूपटल के स्वामी को भूपटल के नीचे की भी स्वामी माना जाता है; भूमि का यदि कोई अन्य व्यक्ति भूपटल के कितने भी नीचे की अतः भूमि में हस्तक्षेप करता है तो वह भूमिगत अतिचार का दोष होगा.
  2. यदि किसी व्यक्ति को एक व्यक्ति की भूमि पर एक निश्चित समय तक ठहरने की अनुमति मिली हुई है तो उस निश्चित अवधि के बाद उस व्यक्ति का ठहरना अतिचार माना जायेगा.
  3. सार्वजनिक सड़क केवल आवागमन के लिए है. कोई भी व्यक्ति जो इन्हें किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग करता है तो वह अतिचार का दोषी माना जायगा.

हैरीसन बनाम ड्यूक ऑफ रूटलैंड (1893) के बाद में यह कहा गया था कि सार्वजनिक सड़क को मटरगश्ती के लिए प्रयोग करना अतिचार है.

Dr. P. नवीन कुमार बनाम म्यूनिसिपल कार्पोरेशन, ग्रेटर बाम्बे, AIR 1989 के वाद में अभिनिर्धारित किया गया कि एक विशेष समुदाय द्वारा सार्वजनिक मार्ग को प्रार्थना स्थल के रूप में प्रयोग करना अतिचार है.

अतिचार के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण बात यह है कि अतिचार का अपकृत्य निरन्तर प्रकृति वाला अपकृत्य है. अतिचार एक बार प्रारम्भ होने पर जब तक जारी रहता है तब तक हर बार एक नया अतिचार माना जाता है. अतः क्षतिग्रहीता व्यक्ति प्रत्येक नये अतिचार के लिए क्षतिपूर्ति पाने का अधिकारी होगा. उदाहरण के लिए यदि एक व्यक्ति किसी अन्य की भूमि पर अनधिकार रूप से कूड़ा डाल देता है तो जब तक वह पड़ा रहेगा, प्रतिदिन नया अतिचार माना जायेगा, और भूमि का स्वामी प्रतिदिन के नये अतिचार के लिए क्षतिपूर्ति पाने का अधिकारी होगा |

भूमिगत अतिचार के प्रकार

भूमिगत अतिचार निम्नलिखित प्रकार से किया जा सकता है-

1. अनुचित प्रवेश द्वारा अतिचार

यह अतिचार का सबसे सामान्य तरीका है; जिससे दूसरे की भूमि पर अनधिकृत रूप से व्यक्तिगत प्रवेश के द्वारा अतिचार किया जाता है. प्रतिवादी द्वारा वादी की भूमि सीमा का तनिक-सा उल्लंघन ही अतिचार के लिए पर्याप्त होता है जैसे खिड़की में हाथ डालना आदि.

2. अनुज्ञप्ति के दुरुपयोग अथवा अवैध रूप से भूमि पर बने रह कर

यदि कोई व्यक्ति किसी भूमि पर उसके स्वामी को स्वीकृति पर वैधानिक ढंग से प्रवेश करता है और अनुज्ञा की अवधि समाप्त होने पर भी भूमि पर कब्जा किये रहता है तो वह अतिचार का दोषी माना जायगा. एक पट्टाधारी यदि पट्टे की अवधि समाप्त होने पर भी भूमि-स्वामी के द्वारा निवेदन करने पर भूमि से नहीं हटता है तो वह अतिचार का दोषी माना जायगा.

3. भूमि पर वस्तुएँ रख कर अतिचार

वादी को भूमि को सीमा का तनिक- सा उल्लंघन अथवा वादी को भूमि से प्रतिवादी का शारीरिक स्पर्श भी भूमिगत अतिचार माना जाता है, भले ही इससे वादी की भूमि की सीमा का अतिक्रमण न हुआ हो. उदाहरण के लिए दूसरे की दीवार में कील ठोंकना, वादी की भूमि पर पत्थर फेंकना, अथवा किसी व्यक्ति की दीवार के सहारे कूड़ा-करकट इकट्ठा करना तकनीकी दृष्टि से अतिचार कहा जायगा.

4. पशुओं के द्वारा अतिचार

किसी व्यक्ति के पशुओं द्वारा किया गया अतिचार उस व्यक्ति के स्वयं के द्वारा किया गया अतिचार माना जाता है. पशुओं द्वारा किये गये अतिचार के लिए विशेष क्षति प्रमाणित करने की आवश्यकता नहीं है. केवल पशुओं द्वारा अतिचार प्रमाणित होने पर ही वादी क्षति प्राप्त करने का अधिकारी हो जाता है. कुत्ता, बिल्ली, बैल, घोड़े, भैसें, सुअर आदि को पशु माना गया है. सामान्यतः कुत्तों के मामले में जब तक प्रतिवादी की असावधानी या क्षति का इरादा प्रमाणित न किया जाय उसे क्षति हेतु उत्तरदायी नहीं माना जाता है, क्योंकि कुत्तों को सदैव बन्द या किसी सीमा में नहीं रखा जा सकता है.

उपचार

भूमिगत अतिचार के मामलों में वादी का निम्नलिखित उपचार उपलब्ध हैं-

  1. वह अतिचारी के विरुद्ध क्षतिपूर्ति वाद चला सकता है, अथवा
  2. वह अपने कब्जे की बलपूर्वक रक्षा कर सकता है अथवा अतिचार को बलपूर्वक निष्कासित या बेदखल कर सकता है, परन्तु यह बल प्रयोग आवश्यकतानुसार होना चाहिए, अथवा
  3. वह निरन्तर अतिचार को रोकने अथवा सम्भावित अतिचार की धमकी के विरुद्ध व्यादेश (Injunction) प्राप्त कर सकता है |

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