समुद्री डकैती की परिभाषा एवं आवश्यक तत्व

समुद्री डकैती की परिभाषा एवं आवश्यक तत्व

परिभाषा

समुद्री डकैती (Piracy) की परिभाषा के सम्बन्ध में बड़ा मतभेद रहा है. परम्परागत अन्तर्राष्ट्रीय विधि के अनुसार, बिना किसी राज्य द्वारा अधिकृत या अनुमति प्राप्त किये निजी हितों तथा दूसरे व्यक्तियों या उनकी सम्पत्ति के विरुद्ध कार्य करने के उद्देश्य से खुले समुद्र में नौपरिवहन करने को समुद्री डकैती कहते हैं.

यह ऐसा कार्य होता है जो युद्ध के समय प्रभुत्वसम्पन्न शासकों द्वारा एक दूसरे के विरुद्ध अधिकृत नहीं होता है. विभिन्न विधिशास्त्रियों ने समुद्री डकैती की विभिन्न परिभाषायें दी हैं.

परन्तु सभी लेखक इस बात से सहमत हैं कि समुद्री डकैती से तात्पर्य समुद्र में डाका डालना या लूटपाट करना है. एक अमेरिकी बाद में संघीय न्यायालय ने यह मत प्रकट किया था कि समुद्र में सशस्त्र जहाज किसी राज्य के प्राधिकार के अन्तर्गत होना चाहिये तथा यदि ऐसा नहीं है तो ऐसे जहाज को समुद्री डकैती डालने वाले जहाज की कोटि में माना जायेगा. इस बात से अन्तर नहीं पड़ेगा कि उक्त जहाज ने डकैती नहीं डाला है.

समुद्री डकैती सम्बन्धी परम्परागत अन्तर्राष्ट्रीय विधि का संहिताकरण, 1958 के खुले समुद्र के जेनेवा अभिसमय (Geneva Convention Of The High Seas, 1958) में किया गया है. जेनेवा अभिसमय के अनुच्छेद 15 में समुद्री बकैती की परिभाषा दी गई है.

अनुच्छेद 15 के अनुसार, समुद्री डकैती निम्नलिखित में से किसी से भी मिलकर बनता है-

  1. किसी प्राइवेट जहाज या हवाई जहाज के नाविकों या यात्रियों द्वारा निजी हितों के लिये हिंसा विरोध लूटपाट या कोई गैर-कानूनी कार्य तथा जो निम्नलिखित को उद्दिष्ट (Directed) करे-
  • खुले समुद्र पर, किसी जहाज या हवाई जहाज के विरुद्ध या व्यक्तियों अथवा उक्त जहाज पर सम्पत्ति के विरुद्ध,
  • किसी जहाज के क्षेत्राधिकार के बाहर किसी स्थान पर जहाज या हवाई जहाज के व्यक्ति अथवा सम्पत्ति के विरुद्ध,
  • किसी ऐसे जहाज या हवाई जहाज के पालन में, इन तथ्यों के ज्ञान, कि वह समुद्री डकैती डालने वाला जहाज है, के बावजूद भाग लेना,
  • उपर्युक्त में वर्णित कार्य को भड़काना या जानबूझ कर उसमें मदद करना |

आवश्यक तत्व

  1. हिंसा या लूटपाट के कार्य निजी हितों के लिये होने चाहिये. युद्ध पोतों, सरकारी जहाजों या हवाई जहाजों द्वारा किये गये कार्यों को समुद्री डकैती नहीं कहा जा सकता.
  2. हिंसा, निरोध अथवा लूटपाट के कार्य किसी जहाज, हवाई जहाज, व्यक्ति या सम्पत्ति के विरुद्ध हो सकते हैं.
  3. हिंसा, निरोध अथवा लूटपाट का कार्य प्राइवेट जहाज या हवाई जहाज के नाविक या कर्मचारी अथवा यात्रियों द्वारा होना चाहिये. किसी युद्धपोत, सरकारी जहाज अथवा हवाई जहाज के कर्मचारी या यात्री द्वारा किये गये कार्य समुद्री डकैती की परिभाषा में नहीं आते हैं.
  4. उक्त कार्य खुले समुद्र अथवा किसी राज्य के क्षेत्राधिकार के बाहर किसी स्थान पर हो सकते हैं.
  5. हिंसा, निरोध अथवा लूटपाट को भड़काने वाले कार्य भी इस परिभाषा के अन्तर्गत आते हैं, बशर्ते कि उपर्युक्त अन्य आवश्यक तत्व उपस्थित हों.
  6. समुद्री डकैती के अपराध के लिये यह आवश्यक नहीं है कि वास्तविक डकैती डाला गया है. यदि डकैती डालने का असफल प्रयास किया गया है तो वह भी समुद्री डकैती मानी जायेगी. इस सम्बन्ध में प्रमुख वाद रि-पायरेसी ज्युरे जेन्तियम [ Re Piracy Jure Gentium (1934) A.C. 586] है.
  7. यदि हिंसा, निरोध अथवा लूटपाट के कार्य में कोई कार्य स्वैच्छिक रूप से ऐसे जहाज के चालान आदि के सम्बन्ध में इस ज्ञान के साथ किया जाय कि सम्बन्धित जहाज, हवाई जहाज समुद्री डाकू (यानी उससे सम्बन्धित कार्य करने वाला) है तो उक्त कार्य समुद्री डकैती की परिभाषा के अन्तर्गत माना जायगा |

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